यह लेख अंग्रेज़ी मूल का हिंदी अनुवाद है। किसी भी अंतर की स्थिति में अंग्रेज़ी संस्करण ही मान्य होगा।
कंपनियों ने वित्त वर्ष 2023-24 में ₹34,908.75 करोड़ और वित्त वर्ष 2019-20 से पाँच वर्षों में ₹1,44,159 करोड़ का CSR व्यय रिपोर्ट किया1। इस पैमाने पर, समय और वर्गीकरण की छोटी त्रुटियों की वास्तविक कीमत होती है: बहुत देर से निर्धारित (designated) की गई परियोजना, किसी एजेंसी को जारी की गई राशि जिसे व्यय के रूप में दर्ज कर लिया गया, या समय-सीमा के कुछ दिन बाद किया गया अंतरण।
इनमें से प्रत्येक निदेशक मंडल का निर्णय है। MCA, CSR को निदेशक मंडल द्वारा संचालित बताता है, जिसमें परियोजनाओं के अनुमोदन या कार्यान्वयन में सरकार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है2। यह टिप्पणी 25 सितंबर 2026 की विधिक स्थिति के आधार पर, 31 मार्च के बाद कंपनी के धन की यात्रा का अनुसरण करती है।
कमी का निर्धारण अनुमोदन के समय ही हो जाता है
यदि कोई कंपनी अपने दायित्व की राशि व्यय नहीं करती, तो निदेशक मंडल को अपनी रिपोर्ट में इसके कारण बताने होंगे, और अव्ययित राशि (unspent amount) दो में से किसी एक मार्ग पर जाती है3।
| मार्ग | कौन-सी राशि | कहाँ जाती है | समय-सीमा (मार्च में वर्ष-समाप्ति) |
|---|---|---|---|
| चालू परियोजना (ongoing project) | किसी चालू परियोजना से संबंधित अव्ययित राशि | उस वर्ष का Unspent CSR Account, जो किसी अनुसूचित बैंक में एक विशेष खाता है | 30 दिनों के भीतर: 30 अप्रैल |
| अन्य सभी | कोई अन्य अव्ययित राशि | अनुसूची VII (Schedule VII) में सूचीबद्ध कोई निधि | छह महीनों के भीतर: 30 सितंबर |
Unspent CSR Account की राशि अंतरण से तीन वित्त वर्षों के भीतर व्यय की जानी चाहिए, और कोई भी शेष राशि तीसरे वर्ष के बाद 30 दिनों के भीतर अनुसूची VII की किसी निधि में भेजनी होती है3,2। समय पर किया गया अंतरण कंपनी अधिनियम, 2013 (Companies Act, 2013) की धारा 135(5) का अनुपालन माना जाता है2।
इस व्यवस्था की तीन विशेषताएँ निदेशक मंडलों को चूक में डाल देती हैं।
'चालू' का दायरा संकीर्ण है। कोई चालू परियोजना अपने आरंभ के वर्ष के बाद तीन वर्ष से अधिक नहीं चलती; वह तब आरंभ होती है जब कार्यादेश जारी होता है या अनुबंध दिया जाता है, और MCA इस सीमा से आगे किसी भी विस्तार को अस्वीकार करता है2। निदेशक मंडल प्रत्येक चालू परियोजना की निगरानी उसकी अनुमोदित समय-सारणी और वर्ष-वार आवंटन के सापेक्ष करता है4। इसलिए चालू परियोजना के रूप में निर्धारण, समय-सारणी और प्रत्येक वर्ष का आवंटन अनुमोदन के कार्यवृत्त में दर्ज होना चाहिए। वर्ष समाप्त होने के बाद कार्यक्रम में कहीं और की कमी को चालू परियोजना के रूप में पुनः वर्णित नहीं किया जा सकता।
अप्रैल में की गई भरपाई से कमी दूर नहीं होती। MCA वर्ष-समाप्ति के बाद के छह महीनों में, चालू परियोजना से भिन्न अव्ययित राशि को CSR गतिविधियों पर व्यय करने से रोकता है; उसे निधि में ही जाना होगा2।
जारी की गई राशि, व्यय की गई राशि नहीं है। किसी कार्यान्वयन एजेंसी (implementing agency) को किया गया संवितरण तभी गिना जाता है जब एजेंसी उस धन का उपयोग करती है2। मार्च में जारी की गई और व्यय के रूप में दर्ज की गई किस्तें वास्तविक कमी को अंतरण की समय-सीमा बीत जाने तक छिपा सकती हैं।
यह खाता शासन संबंधी दायित्वों को भी जीवित रखता है। 2022 के संशोधन नियमों के अंतर्गत, जिस कंपनी के Unspent CSR Account में कोई भी शेष राशि है, उसके लिए CSR समिति रखना और धारा 135(2) से (6) का अनुपालन करना आवश्यक है5; पुस्तक ने यह परंतुक अधिसूचना के एक द्वितीयक पुनरुत्पादन से पढ़ा है। यह प्रावधान हर सीमा से नीचे की कंपनी पर भी लागू होता है, और उस कंपनी पर भी जो धारा 135(9) में दी गई ₹50 लाख की समिति-छूट पर निर्भर है3। क्या कोई नियम अधिनियम द्वारा दी गई छूट को वापस ले सकता है, यह विवाद का विषय हो सकता है। लेखक का पठन यह है कि जब तक कोई शेष राशि है, समिति बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि इसकी लागत रजिस्ट्रार के साथ विवाद की तुलना में कहीं कम है।
प्रभाव आकलन: कौन, कब और किस लागत पर
जहाँ किसी कंपनी का पिछले तीन वित्त वर्षों का औसत CSR दायित्व ₹10 करोड़ या अधिक है, वहाँ ₹1 करोड़ या अधिक परिव्यय वाली उन परियोजनाओं का किसी स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से प्रभाव आकलन (impact assessment) अनिवार्य है जो आकलन से कम से कम एक वर्ष पहले पूरी हो चुकी हों6,2। यह 22 जनवरी 2021 को या उसके बाद पूरी हुई परियोजनाओं पर लागू होता है2। चूँकि यह कसौटी औसत पर आधारित है, इसलिए कोई कंपनी वर्ष-दर-वर्ष इसके दायरे में आ या उससे बाहर जा सकती है।
ये रिपोर्टें निदेशक मंडल के समक्ष रखी जाती हैं और CSR पर वार्षिक रिपोर्ट के साथ संलग्न की जाती हैं, प्रत्येक के कार्यकारी सारांश और वेब लिंक सहित6,5। इसकी लागत को, उस वर्ष के कुल CSR व्यय के 2% या ₹50 लाख, जो भी अधिक हो, तक CSR व्यय के रूप में दर्ज किया जा सकता है5,7। पुस्तक ने यह सीमा 2022 के नियमों के द्वितीयक पुनरुत्पादनों से ली है, इसलिए इस पर निर्भर होने से पहले राजपत्र का पाठ जाँच लेना चाहिए।
सीमाओं से अधिक महत्व नियमों की दो चुप्पियों का है। CSR नियम (CSR Rules) "स्वतंत्र एजेंसी" (independent agency) को परिभाषित नहीं करते8। लेखक का पठन यह है कि आकलनकर्ता स्वतंत्र नहीं है यदि उसने परियोजना का कार्यान्वयन, रूपांकन या निगरानी की हो, वह किसी भी परियोजना पर कंपनी की कार्यान्वयन एजेंसी हो, या वह कंपनी अथवा एजेंसी से संबंधित हो। नियम कोई पद्धति, मानक या अनुवर्ती कार्रवाई भी निर्धारित नहीं करते; MCA का घोषित प्रयोजन कंपनियों को CSR धन लगाने से पहले सुविचारित निर्णय लेने में सहायता करना है6,2। पद्धति चुनना और उसका औचित्य सिद्ध करना कंपनी का काम है, जिससे यह तर्क बनता है कि मापे जाने वाले परिणाम क्षेत्र-कार्य से पहले तय किए जाएँ और शून्य निष्कर्षों को सकारात्मक निष्कर्षों जितनी ही प्रमुखता से रिपोर्ट किया जाए।
धारा 135(7) वास्तव में किस पर दंड लगाती है
धारा 135(5) या (6) के अंतर्गत चूक होने पर कंपनी पर अंतरित की जाने वाली अपेक्षित राशि के दोगुने या ₹1 करोड़, जो भी कम हो, का दंड लग सकता है, और प्रत्येक चूककर्ता अधिकारी (officer in default) पर उसी अपेक्षित राशि के दसवें भाग या ₹2 लाख, जो भी कम हो, का दंड3। यह उप-धारा कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2020 (Companies (Amendment) Act, 2020) द्वारा प्रतिस्थापित की गई थी9, और 22 जनवरी 2021 से अननुपालन एक सिविल दोष (civil wrong) है2। गणना करने पर, अंतरित न की गई राशि ₹20 लाख से अधिक होते ही अधिकारी की अधिकतम सीमा लागू हो जाती है, और ₹50 लाख से ऊपर कंपनी की अधिकतम सीमा।
इससे दो परिणाम निकलते हैं। दंड अंतरण के आधार पर मापा जाता है, इसलिए जो कंपनी कम व्यय करती है, कारण बताती है और समय पर अंतरण करती है, उसने अनुपालन किया है। और MCA दंड को अंतरित की जाने वाली राशि के अतिरिक्त मानता है, इसलिए दंड चुकाने के बाद भी अंतरण देय रहता है2।
एक रिपोर्ट किया गया आदेश इसका प्रभाव दिखाता है। मई 2023 में कंपनी रजिस्ट्रार, कर्नाटक ने न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में एक निजी कंपनी पर दंड लगाया, जिसकी वित्त वर्ष 2020-21 की ₹11,11,871 की अव्ययित राशि 30 सितंबर की समय-सीमा के बाद, 20 दिसंबर 2021 को PMNRF में पहुँची थी। रिपोर्ट किया गया कुल दंड ₹24,46,116 था10, जो कंपनी पर राशि के दोगुने और दो अधिकारियों में से प्रत्येक पर दसवें भाग के अनुरूप है। देर से किए गए अंतरण से दंड टला नहीं। पुस्तक इस आदेश की एक द्वितीयक रिपोर्ट पर निर्भर है।
MCA अनुपालन की निगरानी MCA21 फाइलिंग के माध्यम से करता है2, इसलिए CSR पर वार्षिक रिपोर्ट और CSR-2 ही किसी चूक को रजिस्ट्रार के सामने लाते हैं। इसके नियंत्रण साधारण हैं: प्रत्येक अंतरण के लिए नामित अधिकारी सहित तिथिवार कैलेंडर, स्थायी बैंक अधिदेश, और एजेंसियों के साथ ऐसे समझौते जो 31 मार्च तक के उपयोग का विवरण इतने समय पर उपलब्ध कराएँ कि कमी की गणना की जा सके।
कोई परियोजना विस्तार के लिए कब तैयार है?
अनुपालन अभिलेख इस बारे में कम ही बताते हैं कि कोई परियोजना अधिक धन की पात्र है या नहीं; CSR पर वार्षिक रिपोर्ट में ऊपरी तौर पर दूसरे वर्ष का पायलट और एक परिपक्व कार्यक्रम एक जैसे दिख सकते हैं। पुस्तक कार्यक्रम तत्परता स्तर (Programme Readiness Levels) प्रस्तुत करती है: नौ सोपान, जो दस्तावेज़ीकृत आवश्यकता से आरंभ होकर रूपरेखा, भागीदार, चल रहा पायलट, मूल्यांकित (evaluated) पायलट, विस्तार, पूर्ण कार्यक्रम और सहायता-अवधि (handholding) से होते हुए ऐसे परिणामों तक पहुँचते हैं जो वित्तपोषण समाप्त होने के बाद भी बने रहें। इसका स्वरूप NASA के प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों (technology readiness levels) से लिया गया है11। यह सोपान-क्रम व्यवसायी द्वारा निर्मित है और इसकी वैधता की पुष्टि नहीं हुई है। यह किसी कंपनी की अपनी परियोजनाओं के स्व-आकलन का उपकरण है, और इसका उपयोग किसी अन्य की परियोजनाओं की रेटिंग के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
निर्णायक पड़ाव मूल्यांकित पायलट है: विस्तार, नई रूपरेखा, या समाप्ति। कार्य योजना में बदलाव करने वाला निर्णय समिति की अनुशंसा पर, कारणों को कार्यवृत्त में दर्ज करते हुए, निदेशक मंडल के पास जाता है, और अनुमेय अवधि के भीतर किसी चालू परियोजना की समय-सारणी या आवंटन में परिवर्तन निदेशक मंडल का अधिकार है6,4। कुछ विशेष सोपानों पर कानून का प्रभाव सीधे पड़ता है:
- कम व्यय वाले पायलट। कम व्यय करने वाले एक वर्षीय पायलट की कमी अनुसूची VII की किसी निधि में जाती है3। जिस चरण के वर्ष-समाप्ति के आर-पार जाने की संभावना हो, उसे अनुमोदन के समय ही चालू परियोजना के रूप में निर्धारित करना अधिक सुरक्षित है।
- समय-सीमा। कोई चालू परियोजना अपने पहले वर्ष और उसके बाद तीन वर्षों से आगे नहीं चल सकती2। जिस बिंदु पर MCA के FAQ कुछ नहीं कहते, उस पर लेखक का पठन यह है कि अपनी रूपरेखा, बजट और अनुमोदन वाले किसी वास्तविक नए चरण को नई परियोजना के रूप में अनुमोदित किया जा सकता है; किंतु समय-सीमा फिर से शुरू करने के लिए किसी जारी गतिविधि को नया नाम देना जाँच को आमंत्रित करता है।
- देर से होने वाला अध्ययन। सांविधिक आकलन परियोजना पूरी होने के एक वर्ष बाद ही शुरू हो सकता है2, इसलिए विस्तार का निर्णय कंपनी की अपनी पायलट समीक्षा के आधार पर ही लेना होगा।
पायलट चरणों पर जमा परियोजनाएँ, जिनका हर वर्ष गतिविधि-रिपोर्टों के आधार पर नवीकरण होता है, पायलट-जाल का संकेत देती हैं। जैसा कि पुस्तक में कहा गया है: "जिस पोर्टफोलियो में कोई परियोजना कभी रुकी ही न हो, उसमें निर्णय-पड़ाव होने की संभावना बहुत कम है।" (अनुवाद)
यह टिप्पणी Harshal Kate द्वारा तैयार की जा रही पुस्तक The Section 135 Practice Manual: CSR Compliance for Indian Companies (वित्त वर्ष 2026-27 Edition) पर आधारित है।
विश्लेषण, विधिक सलाह नहीं। 25 सितंबर 2026 की विधिक स्थिति के अनुसार।
संदर्भ
- Ministry of Corporate Affairs (Press Information Bureau), CSR expenditure FY 2019-20 to FY 2023-24 (Rajya Sabha written reply), 10 February 2026, figures for FY 2019-20 to FY 2023-24. https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2226018®=3&lang=2
- Ministry of Corporate Affairs, General Circular 14/2021, FAQs on CSR (File CSR-05/01/2021-CSR-MCA), 25 August 2021, FAQs 2.3, 2.4, 2.6, 6.1–6.3, 7.1–7.4, 8.1, 8.2, 9.1–9.3. https://coal.gov.in/sites/default/files/2024-04/FAQ_CSR.pdf
- Parliament, Companies Act, 2013, section 135 (text as in force, Income Tax Department portal), current text, s.135(5) second proviso, (6), (7), (9). https://www.incometaxindia.gov.in/w/section-135-80
- Ministry of Corporate Affairs, Companies (CSR Policy) Rules, 2014, rule 4 as in force (secondary compilation, ca2013.com), current text, r.4(6). https://ca2013.com/rule-4-companies-corporate-social-responsibility-rules-2014/
- Ministry of Corporate Affairs, Companies (CSR Policy) Amendment Rules, 2022, G.S.R. 715(E) (secondary reproduction), 20 September 2022, proviso to r.3(1); impact-assessment cost cap; Annexure II item 4. https://taxguru.in/company-law/companies-csr-policy-amendment-rules-2022.html
- Ministry of Corporate Affairs, Companies (CSR Policy) Amendment Rules, 2021, G.S.R. 40(E) (secondary reproduction), 22 January 2021, r.5(2) proviso; r.8(3)(a)–(b). https://taxguru.in/company-law/companies-csr-policy-amen.html
- KPMG in India, First Notes: MCA amends certain rules relating to CSR, October 2022, impact-assessment cost cap. https://assets.kpmg.com/content/dam/kpmg/in/pdf/2022/10/first-notes-mca-amends-certain-rules-relating-to-corporate-social-responsibility.pdf
- Ministry of Corporate Affairs, Companies (CSR Policy) Rules, 2014, rule 2 as in force (secondary compilation, ca2013.com), current text, r.2(1) definitions. https://ca2013.com/rule-2-companies-corporate-social-responsibility-rules-2014/
- Parliament, Companies (Amendment) Act, 2020 (No. 29 of 2020), 28 September 2020, s.27(b). https://prsindia.org/files/bills_acts/acts_parliament/2020/Companies%20(Amendment)%20Act,%202020.pdf
- Taxguru, Report of adjudication order of ROC Karnataka under section 135(7) (secondary report), order dated 26 May 2023, amounts and dates of transfer and penalty. https://taxguru.in/company-law/mca-penalty-rs-24-46-lakh-violation-csr-provisions.html
- NASA Earth Science Technology Office, Definition of Technology Readiness Levels, undated, TRL 1 to 9. https://esto.nasa.gov/files/trl_definitions.pdf
विश्लेषण, विधिक सलाह नहीं। स्थितियाँ दर्शाई गई तिथि के अनुसार बताई गई हैं और तब से बदल चुकी हो सकती हैं।